संजय लीला भंसाली, भारतीय सिनेमा में एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपने भव्य सेट, भारी कॉस्ट्यूम और लार्जर-थैन-लाइफ सिनेमैटिक विज़न से फिल्मों को एक अलग मुकाम पर पहुंचाया है। चाहे वह ‘बाजीराव मस्तानी’ हो या ‘पद्मावत’, उनकी फिल्में हमेशा से एक महाकाव्यात्मक अनुभव रही हैं। लेकिन, अब वह अपनी अपकमिंग फिल्म ‘लव एंड वॉर’ के साथ एक नया मोड़ लेने जा रहे हैं। यह फिल्म उनकी पिछली फिल्मों से बिल्कुल अलग है, और इसमें भव्यता के बजाय सादगी और गहराई पर जोर होगा।

संजय लीला भंसाली का नया नजरिया: एक सरल लेकिन गहन दृष्टिकोण
भंसाली की फिल्में हमेशा से उनकी विशालता और भव्यता के लिए जानी जाती हैं, परंतु इस बार उनका इरादा कुछ अलग करने का है। ‘लव एंड वॉर’ में न तो कोई भव्य महल होंगे, न कोई भारी-भरकम कॉस्ट्यूम। यह फिल्म पूरी तरह से समसामयिक है और इसका फोकस कहानी की गहराई और भावनात्मक जटिलताओं पर होगा। भंसाली ने स्पष्ट किया है कि इस फिल्म में कोई पीरियड सेटिंग नहीं है, जो उनकी पिछली फिल्मों की खासियत हुआ करती थी।
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि यह फिल्म उनके लिए बेहद खास है, और यह उनके सामान्य काम से बहुत अलग है। उनका मानना है कि हर निर्देशक के भीतर समय-समय पर एक नया बदलाव आना चाहिए और यही बदलाव उन्हें ‘लव एंड वॉर’ में लाने की प्रेरणा देता है। इस फिल्म के गाने भी बिल्कुल अलग किस्म के होंगे, जो दर्शकों को भंसाली के म्यूजिकल सिग्नेचर से अलग कुछ नया सुनने का मौका देंगे।
सख्त निर्देशक के तौर पर संजय लीला भंसाली की छवि
संजय लीला भंसाली अपने परफेक्शनिस्ट एप्रोच के लिए जाने जाते हैं। वह हमेशा से अपने विजन को पर्दे पर उतारने में किसी भी समझौते के खिलाफ रहे हैं। उनके साथ काम करने वाले कई एक्टर्स ने माना है कि भंसाली के साथ काम करना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है क्योंकि वह अपने काम में इतनी गहराई से जुड़ जाते हैं कि बाकी लोगों को उनके साथ तालमेल बिठाना मुश्किल लगता है।
भंसाली खुद भी इस बात को स्वीकारते हैं। वह कहते हैं, “मेरा दिमाग अक्सर बेचैन रहता है और मैं कभी-कभी खुद समझ नहीं पाता कि मैं क्या चाहता हूं। यह स्थिति सेट पर मौजूद बाकी लोगों के लिए भी मुश्किल पैदा करती है। मैं अक्सर अपने विजन के बारे में स्पष्ट नहीं होता, और इससे सीन को कई बार दोहराना पड़ता है। हालांकि, मुझे ये समझ में आता है कि मेरे साथी कलाकार और क्रू मेरे इस व्यवहार को संभालते हैं और मैं इसके लिए उनकी सराहना करता हूं।”
राज कपूर से प्रेरित फिल्म निर्माण का तरीका
भंसाली को भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक राज कपूर से गहरा लगाव है। उन्होंने कहा है कि जब भी वह डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठते हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि राज कपूर उनके पीछे बैठकर उन्हें गाइड कर रहे हैं। राज कपूर का प्रभाव उनकी फिल्मों में न केवल दृश्यात्मक दृष्टि से बल्कि उनके द्वारा पेश की जाने वाली मानवीय भावनाओं में भी झलकता है। राज कपूर की तरह, संजय लीला भंसाली भी मानते हैं कि फिल्में केवल एक माध्यम नहीं होतीं बल्कि यह लोगों के दिलों तक पहुंचने का एक साधन होती हैं।
वह कहते हैं, “जब भी मैं कोई फिल्म बनाता हूं, तो मैं यह सोचता हूं कि क्या यह फिल्म किसी व्यक्ति के दिल में एक अमिट छाप छोड़ेगी। यह मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है, और यही कारण है कि मैंने ‘लव एंड वॉर’ को बहुत ही व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाने का प्रयास किया है।”

‘लव एंड वॉर’: न ‘संगम’ की रीमेक, न किसी पुरानी फिल्म का साया
जब ‘लव एंड वॉर’ की बात होती है, तो भंसाली स्पष्ट रूप से कहते हैं कि यह फिल्म किसी पुरानी फिल्म की रीमेक नहीं है। उन्होंने इस पर विशेष जोर दिया कि यह फिल्म राज कपूर की क्लासिक फिल्म ‘संगम’ की रीमेक नहीं है, जैसा कि कई लोग कयास लगा रहे थे।
संजय लीला भंसाली का कहना है कि “आपको ‘शोले’ या ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्मों का रीमेक नहीं बनाना चाहिए, तो फिर मैं ‘संगम’ का रीमेक क्यों बनाऊंगा?” यह बयान उनके आत्मविश्वास और उनके काम के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है। वह मानते हैं कि हर फिल्म को अपनी एक अलग पहचान होनी चाहिए, और यह आवश्यक है कि वह पुराने सांचों को तोड़ते हुए कुछ नया पेश करें।
सादगी में छुपी गहराई: ‘लव एंड वॉर’ का दिलचस्प पहलू
जहां संजय लीला भंसाली की पिछली फिल्में भव्यता, महाकाव्यात्मक दृश्यों और शानदार सेट डिज़ाइन के लिए जानी जाती हैं, वहीं ‘लव एंड वॉर’ इसके विपरीत एक सादगीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने वाली फिल्म होगी। इसमें कोई विशाल महल या ऐतिहासिक परिधान नहीं होंगे। इसके बजाय, फिल्म के कथानक और पात्रों के इमोशनल कॉन्फ्लिक्ट पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
संजय लीला भंसाली ने बताया कि यह फिल्म रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल जैसे सितारों की अदाकारी के दम पर खड़ी है, और इसमें गहराई से बुनी गई कहानी दर्शकों को उनके साथ जोड़कर रखेगी।
फिल्म के टाइटल ‘लव एंड वॉर’ से यह साफ होता है कि कहानी प्यार और संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमेगी, लेकिन यह संघर्ष सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक भी होगा। यह फिल्म संभवतः एक गहरी और भावनात्मक यात्रा पर दर्शकों को ले जाएगी, जहां प्यार और संघर्ष के बीच फंसे किरदारों के दिलों की जंग को दिखाया जाएगा।

भविष्य की फिल्म निर्माण की दिशा
संजय लीला भंसाली का यह नया कदम उनकी फिल्म निर्माण शैली में एक नया अध्याय खोलता है। उन्होंने सिनेमा की भव्यता से हटकर एक ऐसी दिशा में कदम रखा है, जहां सादगी में ही गहराई छिपी होती है। ‘लव एंड वॉर’ में न केवल उनकी निर्देशन शैली का बदलाव देखने को मिलेगा, बल्कि यह भी साबित होगा कि भव्यता के बिना भी वह एक बेहतरीन कहानी सुना सकते हैं।
इस फिल्म के जरिए, संजय लीला भंसाली यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह किसी भी प्रकार की कहानी को अपनी अनूठी शैली में पेश कर सकते हैं, चाहे वह भव्य महल और ऐतिहासिक युद्धों से भरी फिल्म हो या फिर एक सरल और गहन प्रेम कहानी।
सिनेमा का नया सफर
‘लव एंड वॉर’ एक ऐसी फिल्म होने वाली है, जो भंसाली के फैंस को चौंका सकती है। यह फिल्म न केवल उनके निर्देशन की नई दिशा को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भंसाली सिर्फ भव्यता के निर्देशक नहीं हैं। वह एक ऐसे फिल्मकार हैं, जो सादगी में भी गहराई और सुंदरता ढूंढ सकते हैं।
रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल की बेहतरीन अदाकारी के साथ, ‘लव एंड वॉर’ एक ऐसी फिल्म बनने जा रही है, जो भव्यता के बिना भी दर्शकों के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ जाएगी।
संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’: एक नया अध्याय, नया नजरियाhttp://संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’: एक नया अध्याय, नया नजरिया


