राजस्थान, जहां रेतीले इलाके और अनोखी संस्कृति का मेल होता है, वहीं यहां की एक अनोखी सब्जी – केर, जो अपनी महंगाई और औषधीय गुणों के लिए मशहूर है, वर्तमान में सुर्खियों में है। केवल चार महीने, यानी अगस्त से नवंबर तक उपलब्ध रहने वाली यह सब्जी, ना केवल स्वाद में अनोखी है, बल्कि इसके स्वास्थ्य लाभ भी कई हैं। आइए जानते हैं इस महंगी सब्जी के बारे में विस्तार से।
केर की पहचान और खेती
प्राकृतिक उगाई जाने वाली सब्जी
केर, जिसे देशी बेर के नाम से भी जाना जाता है, पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से उगती है। इसकी खेती नहीं होती, और यह स्थानीय पेड़ों की झाड़ियों में पाई जाती है। यह सब्जी पर्यावरण के अनुकूल तरीके से उगती है और इसके प्राकृतिक गुण इसे खास बनाते हैं। बाजार में इसकी कीमत 2000 से 3000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जो इसे देश की सबसे महंगी सब्जियों में से एक बनाता है।

साइज का महत्व
केर की अलग-अलग साइज होती हैं, जिसमें छोटे साइज का केर सबसे महंगा बिकता है। छोटे केर की मांग और मूल्य अधिक होते हैं, जबकि मीडियम और बड़े साइज के केर की कीमत 1000 रुपये प्रति किलो तक होती है। यह साइज की विविधता इसे और भी खास बनाती है।
स्वास्थ्य लाभ
औषधीय गुण
केर के कई औषधीय गुण हैं। इसे आयुर्वेद में विशेष रूप से महत्व दिया जाता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर मुकेश कुमार के अनुसार, केर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, रक्त को साफ करती है, और पेट तथा किडनी को स्वस्थ रखती है। इसके नियमित सेवन से मोटापा कम करने और शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।
प्राकृतिक उपचार
इस सब्जी को नमक के पानी में डालकर कड़वाहट कम किया जाता है। तीन से चार दिन तक नमक के पानी में रहने के बाद इसे सुखाया जाता है और फिर बाजार में बेचा जाता है। यह प्रक्रिया इसकी औषधीय गुणों को बनाए रखने में मदद करती है।

बाजार की स्थिति
महंगी कीमत
राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में केर की मांग बढ़ती जा रही है। लोग सालभर इस सब्जी का इंतजार करते हैं, क्योंकि यह केवल चार महीने ही उपलब्ध रहती है। सूखने के बाद इसकी कीमत 200 गुना तक बढ़ जाती है, जो इसके मूल्य को और भी बढ़ाता है।
उपभोक्ता की पसंद
कड़वे स्वाद के बावजूद, लोग केर को अपने आहार में शामिल करने के लिए उत्सुक हैं। इसकी विशेषताएँ इसे न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी लोकप्रिय बनाती हैं। खासकर राजस्थान की शाही सब्जियों में इसे शामिल किया जाता है।
केर का उपयोग
किचन में स्थान
केर का उपयोग सब्जी बनाने, आचार बनाने, और आयुर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है। इसकी कड़वाहट और खास स्वाद इसे भारतीय व्यंजनों में अद्वितीय बनाता है। इसे भुने या पकाए जाने पर स्वाद में एक अलग ही आयाम जुड़ता है।
दवाइयों का पिटारा
आधुनिक चिकित्सा में भी केर के औषधीय गुणों को मान्यता मिल रही है। कई बीमारियों के उपचार में इसका उपयोग रामबाण साबित हो रहा है।

केर की खेती का भविष्य
पर्यावरण अनुकूल
राजस्थान की जलवायु और मिट्टी केर की प्राकृतिक वृद्धि के लिए अनुकूल हैं। हालांकि, इसका संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है, ताकि भविष्य में इसे खोने का खतरा न हो।
किसानों के लिए लाभ
केर की खेती, जो प्राकृतिक रूप से होती है, किसानों के लिए भी बंपर मुनाफा का स्रोत बन सकती है। इसे बढ़ावा देने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।
राजस्थान की केर एक अद्वितीय सब्जी है, जो न केवल अपनी महंगाई बल्कि अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए भी जानी जाती है। इसे खाने से न केवल स्वाद का अनुभव होता है, बल्कि यह कई बीमारियों से भी बचाव करती है। इस महंगी सब्जी की पहचान और उपयोग के लिए सजग रहना आवश्यक है।
इसलिए, अगली बार जब आप बाजार में केर खरीदें, तो उसकी महत्ता और औषधीय गुणों को ध्यान में रखें। आपकी सेहत के लिए यह एक अमूल्य आहार हो सकता है।
राजस्थान की अनोखी सब्जी: केर – एक महंगी, परंतु औषधीय गुणों से भरपूरhttp://राजस्थान की अनोखी सब्जी: केर – एक महंगी, परंतु औषधीय गुणों से भरपूर


