महिला-केंद्रित फिल्मों पर बहस: कंगना रनौत का ‘जिगरा’ पर क्रिप्टिक पोस्ट और महिला सिनेमा का भविष्य

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कंगना रनौत, भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में महिला-केंद्रित फिल्मों की एक अनूठी पहचान है। इन फिल्मों में अक्सर महिलाओं की कहानियों को प्रमुखता दी जाती है, जो समाज में महिलाओं के संघर्ष, उनकी प्रेरणाएं, और उनके जीवन के विविध पहलुओं को उजागर करती हैं। हालांकि, इन फिल्मों को लेकर बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन होता है और क्या ये दर्शकों के बीच अपनी जगह बना पाती हैं, यह एक महत्वपूर्ण सवाल बनता जा रहा है। हाल ही में आलिया भट्ट की फिल्म ‘जिगरा’ और कंगना रनौत की क्रिप्टिक पोस्ट ने इस बहस को फिर से ताजा कर दिया है।

‘जिगरा’ की खराब ओपनिंग: क्या बॉक्स ऑफिस महिला-केंद्रित सिनेमा का सही पैमाना है?

11 अक्टूबर 2024 को रिलीज हुई आलिया भट्ट की ‘जिगरा’ की ओपनिंग उम्मीद से कम रही। बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन मात्र 3.58 करोड़ रुपये की कमाई करने वाली इस फिल्म को क्रिटिक्स से सराहना तो मिली, लेकिन दर्शकों का समर्थन नहीं मिला। ‘जिगरा’ एक महिला-केंद्रित फिल्म है, जिसमें आलिया एक बहन के रूप में अपने भाई को एक विदेशी जेल से छुड़ाने की कोशिश करती हैं। यह एक इमोशनल और संघर्षपूर्ण कहानी है, जो भाई-बहन के रिश्ते को केंद्र में रखती है।

महिला-केंद्रित फिल्मों पर बहस: कंगना रनौत का ‘जिगरा’ पर क्रिप्टिक पोस्ट और महिला सिनेमा का भविष्य
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फिल्म के प्रमोशन के दौरान आलिया ने इसे एक महिला सेंट्रिक फिल्म बताया और कहा कि इसमें महिला सशक्तिकरण के विचार को बढ़ावा दिया गया है। इसके बावजूद, फिल्म की धीमी शुरुआत और बॉक्स ऑफिस पर खराब प्रदर्शन ने इंडस्ट्री में महिला-केंद्रित फिल्मों की सफलता को लेकर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

कंगना रनौत का क्रिप्टिक पोस्ट: क्या ये ‘जिगरा’ पर तंज था?

‘जिगरा’ की रिलीज के ठीक बाद कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में एक क्रिप्टिक पोस्ट लिखा, जिसे आलिया भट्ट और उनकी फिल्म पर तंज माना जा रहा है। कंगना ने लिखा, “जब आप महिला-केंद्रित फिल्मों को बर्बाद करते हैं और तय करते हैं कि ऐसी फिल्में काम न करें, तो वे काम नहीं करतीं, भले ही आप उन्हें बनाते हों। इसे फिर से पढ़ें। धन्यवाद।”

हालांकि, कंगना ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन पोस्ट के समय और संदर्भ को देखते हुए इसे ‘जिगरा’ पर कटाक्ष माना जा रहा है। आलिया की ‘जिगरा’ की धीमी शुरुआत और महिला-केंद्रित फिल्म के रूप में इसके प्रमोशन के मद्देनजर, कंगना की यह टिप्पणी कहीं न कहीं इस फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर सवाल उठाती है।

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कंगना और आलिया: क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत विवाद है?

यह पहली बार नहीं है जब कंगना रनौत ने आलिया भट्ट पर तंज कसा हो। इससे पहले भी, जब आलिया की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ रिलीज होने वाली थी, कंगना ने सार्वजनिक रूप से उसकी कास्टिंग और प्रोडक्शन की आलोचना की थी। उन्होंने आलिया को ‘रोमांटिक कॉमेडी बिम्बो’ कहा और फिल्म को एक डिजास्टर बताया था। हालांकि, कंगना की इस भविष्यवाणी के विपरीत, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल रही और आलिया की परफॉर्मेंस को भी खूब सराहा गया।

कंगना और आलिया के बीच की यह प्रतिद्वंद्विता किसी से छिपी नहीं है। कंगना ने अक्सर आलिया और करण जौहर की फिल्मों को लेकर सवाल उठाए हैं और उनका मानना है कि नेपोटिज्म के चलते आलिया जैसी अभिनेत्रियों को ज्यादा मौके मिलते हैं, जबकि असली प्रतिभा को नजरअंदाज किया जाता है। वहीं आलिया ने भी हमेशा से इन विवादों से दूरी बनाए रखी है और अपने काम पर फोकस किया है।

महिला-केंद्रित फिल्मों का भविष्य: क्या केवल विषय ही काफी है?

महिला-केंद्रित फिल्मों का मकसद केवल महिलाओं की कहानियों को दिखाना नहीं है, बल्कि इन फिल्मों के जरिए समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूती देना भी होता है। ऐसी फिल्मों में नारी सशक्तिकरण, उनके संघर्षों और समाज में उनके महत्व को दिखाने की कोशिश की जाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या बॉक्स ऑफिस के नतीजे इन फिल्मों की सफलता का सही पैमाना हैं?

‘जिगरा’ जैसी फिल्म, जो महिला सशक्तिकरण की बात करती है, अगर बॉक्स ऑफिस पर असफल होती है, तो क्या यह माना जा सकता है कि दर्शक ऐसी कहानियों को देखने में रुचि नहीं रखते? या फिर यह सिर्फ प्रमोशन, मार्केटिंग और फिल्म के अन्य तत्वों की कमी है?

कंगना की पोस्ट से यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है कि क्या महिला-केंद्रित फिल्मों को सफल होने के लिए सिर्फ महिला पात्रों पर ध्यान देना काफी है, या इन फिल्मों को दर्शकों की संवेदनाओं और उम्मीदों के साथ जुड़ने की जरूरत है। कंगना की पोस्ट यह भी इशारा करती है कि सिर्फ महिला-केंद्रित फिल्म बना लेना काफी नहीं है, उसे इस तरीके से प्रस्तुत करना होगा कि वह दर्शकों के दिलों में जगह बना सके।

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महिला-केंद्रित सिनेमा और बॉक्स ऑफिस: वास्तविकता या मिथक?

महिला-केंद्रित सिनेमा का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन हमेशा एक चुनौतीपूर्ण मुद्दा रहा है। कुछ फिल्मों को आलोचनात्मक प्रशंसा मिलती है, लेकिन वे बॉक्स ऑफिस पर नहीं चल पातीं, जबकि कुछ फिल्में दोनों ही स्तरों पर सफल रहती हैं। उदाहरण के तौर पर, विद्या बालन की ‘कहानी’ और ‘डर्टी पिक्चर’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा चुकी हैं, वहीं दूसरी तरफ कंगना रनौत की ‘मणिकर्णिका’ और ‘पंगा’ जैसी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।

इसका मतलब यह है कि केवल महिला-केंद्रित होने से कोई फिल्म सफल नहीं होती। उसकी कहानी, प्रस्तुति, और दर्शकों के साथ जुड़ाव भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, दर्शकों की संवेदनाएं और उनकी प्राथमिकताएं भी बदलती रहती हैं। कुछ दर्शक सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों को पसंद करते हैं, जबकि कुछ अन्य मनोरंजन और ड्रामा पर आधारित फिल्मों को तरजीह देते हैं।

निष्कर्ष: महिला-केंद्रित फिल्मों की चुनौती

कंगना रनौत की क्रिप्टिक पोस्ट और ‘जिगरा’ की धीमी शुरुआत ने महिला-केंद्रित फिल्मों के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। यह सवाल उठता है कि क्या ऐसी फिल्मों को सफल बनाने के लिए सिर्फ विषय ही काफी है या उन्हें और बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की जरूरत है।

आलिया भट्ट और कंगना रनौत दोनों ही अपने-अपने तरीके से महिला सशक्तिकरण को सिनेमा में ला रही हैं। जहां कंगना अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ के जरिए भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को दिखाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं आलिया भट्ट ‘जिगरा’ के जरिए एक इमोशनल और संघर्षपूर्ण कहानी पेश कर रही हैं। दोनों ही अभिनेत्रियां महिला-केंद्रित सिनेमा की पहचान बना रही हैं, लेकिन इस सिनेमा का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि दर्शक इन कहानियों से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं और क्या वे इस सिनेमा को बॉक्स ऑफिस पर सफल बनाते हैं।

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