भोजपुरी संगीत एक ऐसा माध्यम है, जिसने उत्तर भारत, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के दिलों में अपनी गहरी पहचान बनाई है। यह भाषा न केवल एक सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि इसमें वह मिठास और सौम्यता है जो लोगों के दिलों को छू लेती है। इसमें लोकगीत, भजन और निर्गुण जैसे पारंपरिक गीतों की समृद्ध विरासत है। हालांकि, वर्तमान समय में भोजपुरी संगीत पर एक गहरा संकट मंडरा रहा है, और इस पर संकट की घंटी बजाने वाले और कोई नहीं, बल्कि प्रसिद्ध गायक भरत शर्मा हैं।

भरत शर्मा, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के भजन गायक हैं, उन्होंने हाल ही में भोजपुरी संगीत में बढ़ रही अश्लीलता को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि भोजपुरी की वास्तविक पहचान धीरे-धीरे खोती जा रही है। आज के अधिकांश भोजपुरी सुपरस्टार्स गायक नहीं, बल्कि नचनिया बन गए हैं। वह कहते हैं कि ये लोग केवल रातों-रात प्रसिद्धि पाने के लिए अपने गीतों में अश्लीलता का सहारा लेते हैं, जिससे भोजपुरी संगीत की गरिमा और संस्कृति नष्ट हो रही है।
भोजपुरी संगीत की बदलती पहचान
भरत शर्मा के अनुसार, भोजपुरी संगीत की पहचान भजन, निर्गुण और पारंपरिक गीतों से थी। इस संगीत में एक गहरी आध्यात्मिकता और सामाजिक संदेश होता था, जो श्रोताओं के दिलों तक पहुंचता था। लेकिन आजकल के भोजपुरी गायक इस परंपरा से दूर होते जा रहे हैं। वह कहते हैं कि आजकल के कलाकार यह सोचते हैं कि पारंपरिक गीत गाने से उन्हें पहचान नहीं मिलेगी, इसलिए वे अश्लील गानों का सहारा लेते हैं। ये गाने सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होते, बल्कि ये समाज में एक नकारात्मक प्रभाव भी छोड़ते हैं।
शर्मा जी का यह मानना है कि ये तथाकथित “सुपरस्टार्स” सिर्फ नचनिया बन गए हैं, जो केवल अश्लीलता फैलाने का काम कर रहे हैं। यह सिर्फ गाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रदर्शन, वीडियो और डांस भी इसी दिशा में जा रहे हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “नचानियों को सभ्यता और संस्कृति से क्या मतलब है।”

संस्कृति और संगीत का गहरा संबंध
भोजपुरी संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और संस्कृति का आईना भी है। भरत शर्मा का मानना है कि संगीत का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है – लोगों को जोड़ना, उनकी भावनाओं को उजागर करना और उन्हें एक सकारात्मक दिशा में प्रेरित करना। भजन और पारंपरिक गीतों का उद्देश्य यही था कि लोगों को ईश्वर और धर्म से जोड़ना, उनकी आत्मा को शांति प्रदान करना। लेकिन आज की पीढ़ी ने इस उद्देश्य को दरकिनार कर दिया है और अश्लीलता के सहारे संगीत को केवल पैसे और प्रसिद्धि का माध्यम बना दिया है।
सोशल मीडिया और संगीत का प्रभाव
आज के समय में सोशल मीडिया ने संगीत की पहुंच को काफी बढ़ा दिया है। भरत शर्मा का कहना है कि अब कोई भी गीत या भजन तुरंत लोगों तक पहुंच जाता है। यह एक तरफ से अच्छा है कि कलाकारों को अपनी कला दिखाने का मौका मिल रहा है, लेकिन इसका नकारात्मक पहलू यह है कि जो गाने अश्लीलता पर आधारित होते हैं, वे भी तुरंत लोगों के बीच पहुंच जाते हैं और लोकप्रिय हो जाते हैं।
शर्मा जी का यह कहना है कि “भजन हमारे लिए बेहद जरूरी है। धरती पर जितने लोग आए हैं सभी भजन करने आए हैं। हमारा उद्देश्य है कि हम भजन करें और सनातन धर्म का प्रचार करें।” उनका यह मानना है कि मनुष्य जीवन में भजन के सिवा कोई सहारा नहीं है। भजन ही है जो मनुष्य को तारेगा, पार उतारेगा।
अश्लीलता के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत
भरत शर्मा ने न केवल भोजपुरी संगीत की संस्कृति की रक्षा की जिम्मेदारी उठाई है, बल्कि उन्होंने समाज से भी अपील की है कि वे ऐसे अश्लील गीतों और गायकों से दूर रहें। उनका मानना है कि संगीत को सिर्फ मनोरंजन के साधन के रूप में न देखें, बल्कि इसे एक साधना के रूप में अपनाएं। भजन और पारंपरिक गीतों की समृद्धि को समझें और इसे बढ़ावा दें।
वह इस बात पर जोर देते हैं कि आज के युवा भी इस अश्लीलता की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि संगीत सिर्फ सुनने के लिए नहीं है, बल्कि इसे समझने और महसूस करने की भी जरूरत है। जो गीत हमारे समाज की संस्कृति और सभ्यता को धूमिल करते हैं, उनसे दूरी बनानी चाहिए।

पलामू में विशेष कार्यक्रम
हाल ही में झारखंड के पलामू जिले के उंटारी प्रखंड में आयोजित 25 कुंडीय श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ में भरत शर्मा ने शिरकत की थी। इस मौके पर उन्होंने लोगों के साथ अपने विचार साझा किए और उन्हें भजन और पारंपरिक संगीत की अहमियत समझाई। उन्होंने इस मौके पर जीयर स्वामी जी महाराज का भी उल्लेख किया और कहा कि जहां वे पहुंचते हैं, वहां का माहौल अपने आप पवित्र हो जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि पलामू के लोग भजन सुनने में काफी रुचि रखते हैं और वे हर बार यहां आकर बेहद प्रसन्न होते हैं। इस तरह के कार्यक्रम हमारे समाज को भजन और पारंपरिक संगीत की ओर वापस लौटने का एक बेहतरीन माध्यम हो सकते हैं।
भरत शर्मा ने जिस तरह से भोजपुरी संगीत में फैल रही अश्लीलता पर खुलकर बात की है, वह एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह केवल एक कलाकार की चिंता नहीं है, बल्कि एक समाज के रूप में हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी संस्कृति और संगीत की समृद्धि की रक्षा करें। हमें यह समझना होगा कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक माध्यम है जिससे हम अपनी भावनाओं, संस्कारों और संस्कृति को व्यक्त करते हैं।
आज के समय में जहां हर कोई प्रसिद्धि और पैसे के पीछे भाग रहा है, हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारी पहचान हमारे संगीत और संस्कृति में है। हमें ऐसे गीतों और गायकों को प्रोत्साहन देना चाहिए जो हमारी सभ्यता और संस्कृति को बनाए रखें, न कि उन्हें धूमिल करें। भजन, निर्गुण और पारंपरिक गीत ही हमारी असली धरोहर हैं, जिन्हें सहेजने की जरूरत है।


