ईब म्ह म्हारी नई पीढी न भटकती देखूं सूं,
तो मेरी आत्मा रौवअ सै,
कालेज के छोरे-छोरियाँ नशे की बढ़ाई मानह सै,
चौराहे पै खड़े होक्यां, या बारा मैं बैठ क्यां,
बीड़ी-सिगरेट, हुक्का, दारू पी कै अपने आप न “हीरो” समझण लागे सै।
र थौड़ा-सा अपणे मां-बाबू काणी भी देख लो,
जो थामन्ह कर्ज़ा ठा-ठा कर पढ़ावें सै,
म्ह थामन्ह कहणा चाहूं सू,
ज्ह थामने नशा करणा है,तो पढ़ाई और खेला म्ह आगे रहण का नशा करों,
जिससे होजा अपणा हरियाणा का सीना चौड़ा र।
इब म्ह बदलदी राजनीति की बात करूं सूं,
अपण्ह नेता थे लौह पुरुष बंशीलाल जैसे और छोटा बड़े के प्यारे ताऊ देवीलाल जैसे,
जिसन्ह प्रधानमंत्री के पद को ठुकरा दिया था,वो थे म्हारे ताऊ देवीलाल,
इब देखूं, घणे नेता कुर्सी की खातिर नेता बदलूराम हो रहे सै,
इब रहया ना कोए ईमान, कुर्सी के लालच म्ह सारा भाईचारा बिगाड़न म्ह कोए कसर ना छोड़न लाग रहे सै,
म्ह युवाओं को एक बात कहणा चाहूं सू,
कद तक नेताओं के आगे पाछे झंडे ठाए हांडों गे,
इब तो थाम होश म्ह आ जाओ र,
ना आओ किसे की बहकाई म्ह,
इब म्ह बात करूं सूं,इसे मुद्दे पै,जिस पर बात करदा हाणी भी सौ बार सोचणा पड़ सै,
वो मुद्दा है आत्महत्या का,
म्हारे हरियाणा आले आदमी तो हंसी मजाक वाअले होया करदे र,
वो बिना जान पहचान आले की उदासी न भी एक मिनट म्ह दूर कर दिया करदै र,
इब वो खुद ए अपणी जान लेण लाग रहया सै,
जिसपे सब चुप सै।
हर रोज़ दस जण मरैं सै, NCRB 2022 म्ह कहै सै,
हरियाणा का छोरा, जो हंसावै, वो खुद मरै सै!
म्ह थामन्ह यू पूछू सू कि
यूं कै होग्या र अपणह हरियाणा कह-2।
र कित रह गए वो म्हारे संस्कार,
जित ब्याह न पवित्र रिश्ता बताया करदे,
इब इस ब्याह जिसे पवित्र रिश्ते म्ह भी न्यारे होण लाग रहे सै र,
आज लीव इन न ले ली ब्याह की जगा,
कित ब्याह तह पेला छोरा-छोरी का गेल रहणा होगा र,
के रहगी र या पवित्र धरती म्हारी और के रहगे म्हारे पवित्र संस्कार र,
सुन लो,
एक अर्ज थाम मेरी,
नशा करना छोड़ दो,
पढ़ना – लिखना और खेलना सीख लो,
नेताओं की मंशा जानना सीख लो,
अपणा इतिहास त्ह सीख लेनी सीख लो,
उदास चेहरे पह हंसीं लाणा सीख लो,
अपणे संस्कारों का आदर करना सीख लो,
बर्गर, पिज्जा खाणा छोड़ कर,
उल्टाए दूध-दही,घी और चूर्मा खाणा सीख लो,
फालतू की टेंशन लेणी और देणी छोड़ दो,
या धरती अपणी स्वर्ग जिसी सै,
इसको स्वर्ग जिसी रहण दो -2।

मधु ढिल्लों

