प्रिंसेस नीलोफर: रॉयल्टी, खूबसूरती और एक अद्भुत कहानी

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हैदराबाद के आखिरी निजाम की पत्नी प्रिंसेस नीलोफर एक ऐसी महिला थीं जिनकी खूबसूरती और व्यक्तित्व ने उन्हें न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। उन्हें टाइम मैगजीन द्वारा दुनिया की 10 खूबसूरत महिलाओं में से एक माना गया। नीलोफर की कहानी न केवल उनकी रॉयल पृष्ठभूमि को दर्शाती है, बल्कि उनके साहस और स्वतंत्रता की खोज की भी एक अद्वितीय दास्तान है। आइए जानते हैं उनके जीवन के अनछुए पहलुओं के बारे में।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

नीलोफर फरहत बेगम साहिबा का जन्म 1916 में तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में हुआ था। ओट्टोमन साम्राज्य के पतन के समय, उनका परिवार कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा था। दो साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया और जब वह सात साल की थीं, तब अपनी माँ के साथ तुर्की छोड़कर फ्रांस चली गईं। फ्रांस में उनकी जिंदगी सामान्य लोगों की तरह बीतने लगी, लेकिन उन्होंने कभी अपने रॉयल वंश को नहीं भुलाया।

प्रिंसेस नीलोफर
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हैदराबाद के निजाम से विवाह

नीलोफर की किस्मत ने एक नया मोड़ लिया जब उन्हें हैदराबाद के निजाम के बेटे आजम जेह से विवाह के लिए चुना गया। 1931 में हुई इस शादी के बाद, नीलोफर हैदराबाद आईं। यहां वह न केवल अपनी खूबसूरती के लिए जानी गईं, बल्कि उन्होंने निजाम परिवार की परंपराओं में भी बदलाव लाने का साहस किया। उन्होंने पर्दा प्रथा को चुनौती दी और महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में कदम बढ़ाया।

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फैशन और स्टाइल आइकन

नीलोफर केवल एक रॉयल महिला नहीं थीं, बल्कि वह एक फैशन दिवा भी थीं। उनकी साड़ियों के डिजाइन न्यू यॉर्क के फैशन इंस्टीट्यूट में प्रदर्शित किए गए हैं। उन्होंने भारतीय और पश्चिमी दोनों तरह के परिधान पहने, जो उनके स्टाइल के लिए आदर्श बन गए। हालांकि, उनकी लंबाई और खूबसूरती ने उन्हें हमेशा उनके पति से अलग खड़ा किया। नीलोफर 5 फुट 10 इंच लंबी थीं, जबकि उनके पति केवल 5 फुट 3 इंच के थे।

विवादास्पद शादी

नीलोफर की शादी में कई विवाद भी रहे। निजाम परिवार में उनकी सास को उनकी स्वतंत्रता पसंद नहीं आई, जिससे उनके बीच कई बार तनाव उत्पन्न हुआ। कहते हैं कि सास ने अपनी बहू को मारने की कोशिश भी की। इस प्रकार के विवादों ने उनके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित किया और अंततः उनके तलाक का कारण बने।

हैदराबाद का विभाजन और नई शुरुआत

1948 में जब भारतीय सेना ने हैदराबाद को भारत में मिलाने के लिए कार्रवाई की, नीलोफर उस समय फ्रांस में थीं। उन्होंने वापस आने का निर्णय नहीं लिया और यहीं रुक गईं। निजाम के परिवार के अधिकांश सदस्यों ने भी विदेश में रहने का फैसला किया। नीलोफर ने अपने पति से तलाक ले लिया और एक बड़े मुआवजे के साथ अपने नाम पर एक अस्पताल का निर्माण किया, जिसका आज भी नाम ‘नीलोफर अस्पताल’ है।

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हॉलीवुड और दूसरा विवाह

प्रिंसेस नीलोफर का जीवन सिर्फ एक रॉयल पत्नी का नहीं था। तलाक के बाद, उन्हें हॉलीवुड से कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने इन्हें ठुकरा दिया। इसके बाद उन्होंने एक अमेरिकी युद्ध नायक, लेखक और फिल्म निर्माता एडवर्ड पोप से विवाह किया। यह विवाह उनके लिए नई शुरुआत साबित हुआ, जिसमें उन्होंने एक नई पहचान बनाई।

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विरासत और प्रभाव

प्रिंसेस नीलोफर का जीवन रॉयलिटी, स्वतंत्रता और सुंदरता का प्रतीक बना रहा। उनका व्यक्तित्व और उनका फैशन आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। इतिहासकारों का मानना है कि अगर नीलोफर को अपने समय का पूरा समर्थन मिलता, तो उनका नाम दुनिया की महान महिलाओं में शुमार होता।

उनका निधन 1989 में फ्रांस में हुआ, और उन्हें अपनी मां के बगल में दफनाया गया। प्रिंसेस नीलोफर का जीवन केवल एक रॉयल परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत, स्वतंत्र और साहसी महिला की दास्तान है, जिसने अपनी खूबसूरती और प्रतिभा से दुनिया को प्रभावित किया।

प्रिंसेस नीलोफर की कहानी हमें यह सिखाती है कि खूबसूरती केवल बाहरी नहीं होती; यह आत्मविश्वास, साहस और स्वतंत्रता की भावना से भी जुड़ी होती है। उनका जीवन एक प्रेरणा है उन सभी महिलाओं के लिए जो अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। नीलोफर का नाम हमेशा उन महिलाओं के लिए याद रखा जाएगा, जिन्होंने अपनी रॉयल पृष्ठभूमि के बावजूद अपनी स्वतंत्रता और पहचान को बनाए रखा।

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