‘दंगल’: एक ब्लॉकबस्टर फिल्म का अनकहा सच और बबीता फोगाट का दर्द

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साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म ‘दंगल’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, बल्कि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गई। आमिर खान के शानदार अभिनय और नितेश तिवारी की उत्कृष्ट निर्देशन में बनी इस फिल्म ने 2000 करोड़ रुपये की कमाई की, और हरियाणा की बेटियों, गीता और बबीता फोगाट की प्रेरणादायक कहानी को बड़े पर्दे पर जीवंत किया। लेकिन इस फिल्म के पीछे की कहानी केवल ग्लैमरस दुनिया की चमक-दमक नहीं है; इसमें छिपा है एक दर्द और संघर्ष, जो बबीता फोगाट के शब्दों में बयां होता है।

दंगल
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दंगल का प्रभाव

‘दंगल’ ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ, बल्कि यह देश में महिला कुश्ती को भी एक नया मुकाम दिया। फिल्म ने दिखाया कि किस तरह महावीर फोगाट ने अपनी बेटियों को कुश्ती में प्रशिक्षण देकर समाज के कई पूर्वाग्रहों को तोड़ा। इस फिल्म की बदौलत बबीता और गीता की कहानी ने लाखों लोगों को प्रेरित किया, और दोनों बहनों ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में भारत का नाम रोशन किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सफलता के बावजूद, फोगाट परिवार को फिल्म के निर्माताओं से बहुत कम मुआवजा मिला?

बबीता का खुलासा

हाल ही में, बबीता फोगाट ने एक इंटरव्यू में फिल्म के निर्माताओं से मिली रकम के बारे में बात की। उन्होंने खुलासा किया कि फोगाट परिवार को फिल्म की कुल कमाई का 1% से भी कम मिला। जब एंकर ने पूछा कि क्या उन्हें 20 करोड़ रुपये मिले, तो बबीता ने कहा कि यह राशि केवल लगभग 1 करोड़ रुपये थी, जो कि कुल कमाई का महज 10% का आधा था।

बबीता ने यह भी बताया कि यह डील आमिर खान के शामिल होने से पहले ही निर्माताओं के साथ तय की गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि फोगाट परिवार को उनकी कहानी के लिए सही मुआवजा नहीं मिला, जबकि फिल्म ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की।

सम्मान की कीमत

जब बबीता से पूछा गया कि क्या उन्हें इस मुआवजे को लेकर दुख होता है, तो उन्होंने कहा, “नहीं। क्योंकि मेरे पिता, महावीर फोगाट ने कहा था कि हमें केवल लोगों का प्यार और सम्मान चाहिए।” उनका यह बयान दर्शाता है कि परिवार के लिए सम्मान और प्रतिष्ठा हमेशा पैसे से अधिक महत्वपूर्ण रही है। बबीता ने कहा कि लोगों के प्यार के कारण ही वह घर-घर में मशहूर हुईं, न कि फिल्म के कारण।

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नाम बदलने का प्रस्ताव

बबीता ने याद किया कि जब आमिर खान और उनकी टीम फिल्म की तैयारी कर रहे थे, तो उन्होंने पात्रों के नाम बदलने का सुझाव दिया था। लेकिन महावीर फोगाट ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि उनकी बेटियों की कहानी को असली नामों के साथ ही पेश किया जाना चाहिए। इस निर्णय ने न केवल उनके परिवार की पहचान को बनाए रखा, बल्कि इसने फिल्म को भी एक प्रामाणिकता दी।

कुश्ती अकादमी का प्रस्ताव

बबीता ने बताया कि जब फिल्म ने व्यावसायिक सफलता प्राप्त की, तो उनके पिता ने आमिर की टीम के सामने हरियाणा में एक कुश्ती अकादमी खोलने का प्रस्ताव रखा। बबीता ने कहा कि उनकी टीम ने इस पर न तो हां कहा और न ही ना, जिससे यह योजना कभी भी सफल नहीं हो पाई। इस बात से स्पष्ट होता है कि कैसे एक सफल फिल्म के बाद भी, वास्तविकता में कुछ योजनाएं और सपने अधूरे रह जाते हैं।

दंगल: एक अभूतपूर्व सफलता

‘दंगल’ को सिद्धार्थ रॉय कपूर की यूटीवी मोशन पिक्चर्स और आमिर खान प्रोडक्शंस द्वारा सह-निर्मित किया गया। फिल्म में आमिर खान ने महावीर सिंह फोगाट का किरदार निभाया, जबकि फातिमा सना शेख और ज़ायरा वसीम ने गीता फोगाट का और सान्या मल्होत्रा और सुहानी भटनागर ने बबीता फोगाट का किरदार निभाया। साक्षी तंवर ने फोगाट बहनों की मां का रोल निभाया। इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में अब तक की सबसे बड़ी वैश्विक हिट का दर्जा हासिल किया है, लेकिन इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है।

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बबीता का संघर्ष

बबीता फोगाट की कहानी केवल एक कुश्ती चैंपियन बनने की नहीं है; यह एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसने कई संघर्षों का सामना किया। फोगाट परिवार ने न केवल समाज के रूढ़िवादिता को चुनौती दी, बल्कि यह भी साबित किया कि अगर इरादा मजबूत हो तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। लेकिन यह भी सच है कि इस यात्रा में उन्हें आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

‘दंगल’ ने न केवल बबीता और गीता को दुनिया के सामने लाया, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि सिनेमा किस तरह समाज के विचारों को बदल सकता है। लेकिन इस कहानी के पीछे का सच यह है कि कई बार वास्तविकता से परे भी कुछ होता है। बबीता फोगाट का दर्द यह बताता है कि कैसे कभी-कभी सिनेमा की सफलता व्यक्तिगत संघर्षों और आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पाती।

आज, बबीता और उनकी बहनें केवल कुश्ती में ही नहीं, बल्कि हर उस क्षेत्र में प्रेरणा बन गई हैं, जहां महिलाएं अपनी आवाज़ उठाने के लिए तैयार हैं। ‘दंगल’ ने जो भी दिया, उसके बावजूद यह सुनिश्चित करता है कि हर संघर्ष और हर सफलता की एक कहानी होती है, जो कभी-कभी अनकही रह जाती है।

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