स्कूल एवं कॉलेज

नवीनतम सिफारिशों व कृषि तकनीकों को किसानो तक शीघ्र पहुंचाना जरूरी: प्रो. बी.आर. काम्बोज वैज्ञानिकों ने प्रदेशभर के कृषि अधिकारियों के साथ किया मंथन

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आरंभ हुई दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला संपन्न हुई जिसमें प्रदेशभर के कृषि अधिकारियों के साथ वैज्ञानिकों ने कार्यशाला में रबी फसलों की समग्र सिफारिशों के बारे में विस्तृत चर्चा की गई तथा कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया।
इस अवसर पर मुख्यातिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कार्यशाला में उपस्थित कृषि अधिकारियों से आहवान किया कि शोध की गई नई सिफारिशों को पूरे प्रदेश में किसानों तक पहुंचाना होगा। साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों को फसलों की मुख्य समस्याओं को ध्यान में रखकर शोध करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही शोध के विकास कार्यों पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में अनुमोदित की गई आठ नई सिफारिशों में चार नई किस्में, जिसमें देसी चने की हरियाणा चना-6 (एचसी-6), जई की एचएफओ-611 एवं एचएफओ-707 तथा चंद्रशूर की एचएलएस-4 को शामिल किया गया है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम हरियाणा के सिंचित क्षेत्रों में जौ की बिजाई अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से नवम्बर के पहले सप्ताह के बीच करना, दाना मटर में निम्न सल्फर स्तर वाली जमीन में 12 कि.ग्रा. सल्फर प्रति एकड़ एवं निम्न व मध्यम पौटाश वाली जमीन में 8 कि.ग्रा. पौटाश प्रति एकड़ की दर से बिजाई के समय डालना, टिकाऊ खेती के लिए ज्वार-बरसीम फसल चक्र में जैविक चारा उत्पादन तथा गेंहू के पीला रतुआ के नियंत्रण के लिए 120 ग्रा. नैटिवो प्रति एकड़ स्प्रे करना भी नई समग्र सिफारिशों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों व कृषि अधिकारियों के आपस के तालमेल से ही किसान का भला हो सकता है। हरियाणा एक ऐसा प्रदेश है जहां कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक व प्रदेश के कृषि अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित की जाती है जिसमें किसान के खेत में आई समस्या के समाधान के लिए कृषि अधिकारी अपनी बात वैज्ञानिकों के पास लेकर जाते हैं तथा वैज्ञानिक इन समस्याओं के अनुरूप ही अपनी शौध कार्य प्लान करके चलते है ताकि ये समस्या दोबारा न आए व किसान की आमदनी बढ़े।

फसल अवशेष जलाना व उर्वरकों के अत्याधिक प्रयोग को रोकना अत्यंत आवश्यक: डॉ. हरदीप सिंह

इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा के महानिदेशक डॉ. हरदीप सिंह ने कहा कि फसल अवशेष जलाना व उर्वरकों का अत्याधिक प्रयोग रोकना अत्यंत आवश्यक। उन्होंने कहा कि खाद की कमी नहीं है बल्कि उसका वितरण सही तरीके से करने की जरूरत है। उन्होंने पराली प्रबंधन, रबी फसलों की समग्र सिफारिशों व नवीनतम तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने व आगामी रबी सीजन में उर्वरक की उपलब्धता और वितरण को सही तरीके से करवाने के बारे में सभी कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा चलाई जा रही कृषक हितेषी स्कीमों के बारे में विस्तार से बताया।
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने सभी अधिकारियों व वैज्ञानिकों का स्वागत किया और कार्यशाला के नोडल ऑफिसर डॉ. हवा सिंह सहारण ने उपस्थित सभी का धन्यवाद किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button