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मुंबई: कोर्ट ने ‘रिपब्लिक टीवी’ के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. अर्नब गोस्वामी को 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बुधवार तड़के पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार किया था. इसके बाद पुलिस ने उन्हें अलीबाग कोर्ट में पेश किया.

लंबी बहस के बाद कोर्ट ने गोस्वामी को 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया. कोर्ट ने पुलिस रिमांड की मांग को खारिज कर दिया.

इससे पहले पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि अलीबाग पुलिस की एक टीम ने गोस्वामी को उनके घर से गिरफ्तार किया. इस दौरान गोस्वामी ने दावा किया कि पुलिस ने उनके घर पर उनके साथ बदसलूकी की.

अधिकारी ने बताया कि 2018 में एक आर्किटेक्ट और उनकी मां ने कथित तौर पर गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी द्वारा उनके बकाया का भुगतान न किए जाने के कारण आत्महत्या कर ली थी.

इस वर्ष मई में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने आर्किटेक्ट अन्वय नाइक की बेटी अदन्या नाइक की नई शिकायत के आधार पर फिर से जांच का आदेश दिये जाने की घोषणा की थी.

देशमुख ने बताया था कि अदन्या ने आरोप लगाया है कि अलीबाग पुलिस ने गोस्वामी के चैनल द्वारा बकाया भुगतान ना करने के मामले में जांच नहीं की. उसका दावा है कि इस कारण ही उसके पिता और दादी ने मई 2018 में आत्महत्या कर ली थी.

पुलिस कार्रवाई की हुई आलोचना
अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी की पत्रकार संगठनों और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर समेत कई नेताओं ने निंदा की है. जावड़ेकर ने कहा कि यह महाराष्ट्र में “प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है” और इससे “आपातकाल के दिनों” की याद आती है.

वहीं न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने कहा कि यद्यपि वह गोस्वामी की ‘‘पत्रकारिता शैली’’ से सहमत नहीं है, लेकिन यदि अधिकारियों ने मीडिया संपादक के खिलाफ कोई ‘‘बदले की कार्रवाई’’ की है तो संगठन इसकी निन्दा करता है.

इंटीरियर डिजाइनर के परिवार का आरोप- ‘अर्नब गोस्वामी की वजह से जांच को दबाया गया’



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